यह तस्वीर मानव शरीर के सात चक्र (7 Chakras), ऊर्जा प्रवाह और इड़ा–पिंगला–सुषुम्ना नाड़ियों का एक चार्ट दिखाती है। इसमें ध्यान की मुद्रा में बैठे व्यक्ति के शरीर पर अलग-अलग रंगों के ऊर्जा केंद्र दिखाए गए हैं। साथ में मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक गुणों से जुड़े कुछ अंग्रेज़ी विवरण भी हैं।
मैं इसे चक्रों के क्रम, उनके रंग, स्थान, पारंपरिक अर्थ और ध्यान में उनके उपयोग के अनुसार विस्तार से समझाता हूँ। तस्वीर में छोटे अक्षर धुंधले हैं, इसलिए कुछ लिखे हुए शब्दों को निश्चित रूप से पढ़ पाना संभव नहीं है।

1. तस्वीर में दिखाए गए सात चक्र
1. सहस्रार चक्र — Crown Chakra
रंग: बैंगनी या सफेद
स्थान: सिर के सबसे ऊपर।
पारंपरिक अर्थ: आध्यात्मिक जागरूकता, चेतना, आत्मज्ञान और जीवन के व्यापक उद्देश्य से जुड़ा माना जाता है।
ध्यान अभ्यास: शांत बैठकर सिर के ऊपर प्रकाश की कल्पना करना।

2. आज्ञा चक्र — Third Eye Chakra
रंग: गहरा नीला या इंडिगो
स्थान: दोनों भौंहों के बीच।
पारंपरिक अर्थ: अंतर्ज्ञान, एकाग्रता, कल्पनाशक्ति और आत्मनिरीक्षण।
ध्यान अभ्यास: भौंहों के बीच ध्यान केंद्रित करना और श्वास पर ध्यान देना।

3. विशुद्ध चक्र — Throat Chakra
रंग: नीला
स्थान: गले के क्षेत्र में।
पारंपरिक अर्थ: संवाद, स्पष्ट अभिव्यक्ति, सत्य बोलना और अपनी बात रखना।
ध्यान अभ्यास: धीमी श्वास, शांत स्वर में मंत्र-जप और सचेत संवाद।

4. अनाहत चक्र — Heart Chakra
रंग: हरा
स्थान: छाती के मध्य में।
पारंपरिक अर्थ: प्रेम, करुणा, सहानुभूति, क्षमा और भावनात्मक संतुलन।
ध्यान अभ्यास: कृतज्ञता का अभ्यास करना और अपने तथा दूसरों के प्रति करुणा विकसित करना।

5. मणिपुर चक्र — Solar Plexus Chakra
रंग: पीला
स्थान: नाभि के आसपास, ऊपरी पेट का क्षेत्र।
पारंपरिक अर्थ: आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति, अनुशासन, निर्णय लेने की क्षमता और व्यक्तिगत शक्ति।
ध्यान अभ्यास: सीधी मुद्रा में बैठकर श्वास पर ध्यान देना और अपने लक्ष्यों को स्पष्ट करना।

6. स्वाधिष्ठान चक्र — Sacral Chakra
रंग: नारंगी
स्थान: नाभि के नीचे, निचले पेट और श्रोणि का क्षेत्र।
पारंपरिक अर्थ: रचनात्मकता, भावनाएँ, आनंद, संबंध और जीवन के प्रति सहजता।
ध्यान अभ्यास: सहज श्वास, हल्का ध्यान और अपनी भावनाओं को बिना आलोचना के पहचानना।