दो टीमें, दो भाव

मैच कुंडली में दोनों टीमों को अलग-अलग भावों से देखा जाता है। एक टीम को लग्न (पहला भाव) से और दूसरी टीम को सप्तम भाव (सातवाँ भाव) से। सातवाँ भाव ज्योतिष में सामने वाले, प्रतिद्वंद्वी या साझेदार का भाव है, इसलिए यह विरोधी टीम का प्रतिनिधित्व करता है।

कौन-सी टीम लग्न से देखी जाए?

यह क्रिकेट ज्योतिष का सबसे चर्चित प्रश्न है, और अलग-अलग ज्योतिषी अलग नियम अपनाते हैं:

  • मेजबान (Home) टीम: कुछ ज्योतिषी घरेलू मैदान पर खेल रही टीम को लग्न देते हैं।
  • फिक्स्चर में पहला नाम: कुछ ज्योतिषी आधिकारिक कार्यक्रम में पहले लिखी गई टीम को लग्न मानते हैं।
  • पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम: कुछ ज्योतिषी टॉस के बाद पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को लग्न देते हैं।

सबसे ज़रूरी नियम: कोई भी एक नियम चुनें और उसे हर मैच में लगातार अपनाएँ। नियम बदलते रहने से आप यह कभी नहीं जान पाएँगे कि आपका विश्लेषण कहाँ सही था और कहाँ नहीं।

सातवें भाव से गिनती

जब दूसरी टीम सातवें भाव से देखी जाती है, तो उसके लिए भी "अपने" भाव सातवें भाव से गिने जाते हैं। उदाहरण के लिए:

  • पहली टीम का छठा भाव (प्रतिद्वंद्वी पर विजय) = कुंडली का छठा भाव।
  • दूसरी टीम का छठा भाव = सातवें से छठा = कुंडली का बारहवाँ भाव।
  • पहली टीम का ग्यारहवाँ भाव (लाभ, सफलता) = कुंडली का ग्यारहवाँ भाव।
  • दूसरी टीम का ग्यारहवाँ भाव = सातवें से ग्यारहवाँ = कुंडली का पाँचवाँ भाव।

इसीलिए क्रिकेट ज्योतिष में एक टीम के लिए शुभ भाव, दूसरी टीम के लिए अशुभ भाव बन जाते हैं। यही "आमने-सामने" का सिद्धांत मैच कुंडली को रोचक बनाता है।